आज फिर आँखों के सामने वो सौम्य रूप बार याद आ रहा है| शांत, गंभीर पर उतना ही हँसमुख| एक हल्की सी मुस्कान भी बाकियों के खुश दिखने की सौ चेष्टाओं से ज़्यादा सच्ची लग रही थी| वो गौरव है–सुदृढ़ शरीर, गहरी आँखे, उसके अभिन्न से कद को भिन्न बनाते वो कंधे| व्यंग्य या विरोध की चोट करने से पहले, उन होठो का हल्का मुस्कुराना…आह!

क्यों, क्या हुआ? हूँ मैं महेश की विवाहिता, है मेरा समाज के अबरब के चश्मे में दिखता दो बच्चों और सास-ससुर सहित एक भरा-पूरा परिवार| मेरे जीवन में रिवाज़ों का अंकुश लगाया जा सकता है, मेरी सोच इस बंधन से मुक्त है, स्वच्छंद है| मेरी शर्म मेरे कमरे के पर्दे के पीछे ख़त्म हो जाती है| यहाँ मेरा संसार बसता है–कुचली इच्छाओं का, त्रस्त भावनाओं का, असम्मानित अधिकारों का|

विवाह के नौवे साल बाद भी हृदय का वह स्थान रिक्त है| महेश को मैं कभी उस सम्मान का अधिकारी नहीं समझ पाई जो इस रिश्ते में होना चाहिए था| दो बच्चे तो हो गए, पर स्नेह स्थापित नहीं हो पाया| “तुम घर पर ही रहकर बच्चों को पढ़ाया करो, बाहर लोगों की नज़रे ठीक नहीं|” हाँ, यही शब्द थे उसके| विवाह के पहले साल ही ऐसे आघात कई बार हुए, ऐसे जिनमें मेरी शालीनता पर प्रश्न उठे|

इसे प्रेम आस्क्ति या भोग-लालसा कहें, पर गौरव को देख मुझमें जाने कैसे विद्रोह और विच्छेद को आतुर करती शक्ति जाग उठती है| हो सकता है गौरव के प्रति केवल इस जीवन से बाहर निकलने की आस आकर्षित करती हो, मेरे लिए यह शक्ति उसके आलंगन से ऊपर है|

कीवाड़ के पीछे से महीनों मैंने दोनो की बातों को बड़े ग़ौर से सुना है–महेश के फूहड़ तंजों की और उस पर एक विद्वान न सही पर एक सुलझे हुए गौरव की उत्तम उत्तर की| जब घर पर जमी पहली बैठक में मैं चाय देने गई थी, तब पहली बार मैं गौरव के इतने क़रीब थी| मुझे वो महेश से अधिक परिचित लगा| मुझे वही रोम रोम में कौमार्य का उल्लहास महसूस हुआ जो तब हुआ था जब महेश मुझे देखने मेरे घर आया था और लजाती हुई नज़रों से मैंने एक नए जीवन का सपना पाला था|

अब सोचती हूँ की विद्रोह की यह शक्ति इतने वर्ष कहाँ लिप्त थी| यदि आज मैं इस घर को छोड़, गौरव की ओर बढ़ती हूँ तो उसके मुझे ना अपनाने के डर से अधिक इस घर से बाहर निकलने की प्रस्न्नता होगी| दुतकरी हुई औरत का जीवन भले ही संघर्षमय हो, पर इस जीवन का स्वाद मेरे नियमों पर तय होगा | नहीं चाहिए ऐसे रिश्ते का लिहाज़ जो मेरे अस्तित्व और प्रेम की उपेक्षा करता हो|

Advertisements