पानी पर बसा शहर,

चादर कोहरे की ओढ़े

किनारों पर स्नेहातुर कमल खिले,

बाह्य शांत, भीतर अस्थिर

तरल भावनाओं का

शहर अभिलाशाओं का

कोहरा वेदनाओं का

और कमल है उनका जो पार कर चले ये शहर,

और पहुँचे हैं तृप्तिमय सीमा पर |

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