यादें टूट रहीं हैं, कॉलेज की बिल्डिंग बदल रही है,

नए नए रंग लग रहे, नई ईमारत, नए पेड़

नया सा सब ख़ूब सलोना, बस एक नहीं यादों का कोना |

कहाँ रही बरगद की छैयाँ, कहाँ गया वो रेडी वाला,

कहाँ रही सोसाइटी की गलियाँ, नहीं रहा एचओडी का वो कमरा,
कहाँ गया कमेटी की अड्डा? आह! अब सब बदल चुके!

लोगों की अब चाल अलग है, बातों का अंदाज़ अलग है

नया नया फैशन है, नए बहानें, नया हॉस्टल

नया सा सब ख़ूब सलोना, बस एक नहीं यादों का कोना |

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