जिसके होने का एहसास न हो, उसके न होने का ग़म कैसा !
जिसे पाने की चाहत न रही, उसे खोने का सितम कैसा!

जिस शहर में यार न हो, उस शहर का हरम कैसा !

जिसके आने से दिल-ए-गुल में रौनक न हो, उसके न आने पर मातम कैसा!

जब पीर जाने से दुआ पूरी न हो, तो जाने का तकल्लुफ़ कैसा!

जब पास आने की आहट ही न हो, तो दूर जाने पर चुभन कैसी!

जब ऊपर देखे से हैरत न हो, उस आसमाँ का दीदार ही कैसा!

जिसके होने का एहसास न हो, उसके न होने का ग़म कैसा!
जिसे पाने की चाहत न रही, उसे खोने का सितम कैसा!

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