soul-searching

 

आज एक नए चेहरे से मिले

एक अजनबी जो हर रोज़ साथ चलता है,

लाखों बातें मूक ही कहता है|

रोज़ वो कुछ बदले है,

रोज़ उसे थोड़ा और जाने हैं|

 

रूबरू हम जब भी होते,

ख़ुद ही को और पहचाने हैं,

कई दफ़ा हैरान हुए हैं

कभी साहस, कभी मूढ़ता

नया पल नया रंग दिखाए है|

 

सच, वो आइने का अजनबी यूहीं हैरान करे है

कुछ है ख़ुद में जो हम आप न जानें हैं

अरे छोड़ो जो कहते हो कि दुनिया बदले है,

ग़ौर करो तो पाओगे,

बदलता सिर्फ़ यही अजनबी है|

 

 

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