जाते हुए लम्हों को नज़दीक से ग़ुज़रते देखा, पर अफ़सोस यही रहा कि न जीकर देखा न उन्हे ख़िलते देखा |
खिलते देखा रंगों को पर यारों पर न चढ़ते देखा, पक्की देखी कट्टी देखी पर दिल को न मिलते देखा |

मिलते देखा नदिया को पर न सबमें घुलते देखा, बहते देखा थमते देखा पर अभिमान न चढ़ते देखा |

चढ़ते देखा गुस्से को पर ज़्यादा देर न टिकते देखा, लाल देखा पीला देखा पर असर न चलते देखा |

चलते देखा परवाने को पर इश्क को न भूलते देखा, रोते देखा खोते देखा पर आगे न बढ़ते देखा |

बढ़ते देखा हाथों को पर कभी आराम न देखा, मेहनत देखी संयम देखा पर किस्मत को न बदलते देखा |

बदलते देखा लोगों को पर साधू न होते देखा, हँसते देखा लड़ते देखा पर ग़म को न ढ़लते देखा |

ढ़लते देखा रईसों को पर दंभ न घटते देखा, कमाते देखा उड़ाते देखा पर सुकूं से न जीते देखा |

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